Xtremo Review: परदे पर हिंसा देखकर एक्स्ट्रीमो से कर सकते हैं अपना गुस्सा शांत

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Xtremo Review: क्या हिंसा किसी समस्या है हल है? क्या हिंसा से आपके अंदर का गुस्सा शांत हो सकता है? क्या दिमाग में जो उथल पुथल चल रही है, वो परदे पर खून, मार-पीट, गोलीबारी देख कर खत्म की जा सकती है. दरअसल, फिल्मों के माध्यम से बहुत सी भावनात्मक परिस्थितयों से जूझा जा सकता है. परदे पर होती हिंसा देख कर कई बार मन में भरे आक्रोश को एक दिशा मिल जाती है और जब हीरो या हीरोइन, अपने से कहीं शक्तिशाली विलेन की धुलाई कर रहा होता है, देखने वालों को एक आत्मिक सुख की अनुभूति होती है. ऐसा लगता है कि हम स्वयं उस हीरो की जगह हैं और परिस्थितयां वो विलन हैं जिसकी हम धुनाई कर रहे हैं.

नेटफ्लिक्स पर हाल ही में एक नयी फिल्म रिलीज़ हुयी है – एक्स्ट्रीमो. फिल्म मूलतः स्पेनिश में है लेकिन इसका इंग्लिश डब भी उपलब्ध है. पिछले कुछ वर्षों में कई हिंसक फिल्में रिलीज़ हुई हैं लेकिन क्वेंटिन टैरेन्टीनो की किल बिल भाग 1 और 2 के अलावा किसी फिल्म में हिंसा का इतना निजी स्वरुप देखने को नहीं मिला है. जैसे किल बिल देखते समय हीरोइन उमा थर्मन के किरदार से हमें विशिष्ट सहानुभूति हो जाती है और जब वो जापानी तलवार कताना से या बन्दूक से या अपने हाथों से अपने दुश्मनों का अंत करती है, हमें उनकी जीत की ख़ुशी होती है. बहुत समय बाद एक्स्ट्रीमो एक ऐसी ही फिल्म है. इसमें हीरो के प्रति एक अजीब अपनापन जन्म लेता है, उसके दुःख में सहभागी होने का मन करता है और जब वो अपनी बहन के साथ मिल कर दुश्मनों का खात्मा करता है, संभवतः उस से ज़्यादा ख़ुशी हमें होती है.

मैक्स (टीओ गार्सिया) एक बड़ी गैंग में काम करता है जिसके लिए किसी की भी हत्या करना कोई बड़ी बात नहीं है. गैंग के मालिक उसे अपने बेटे की तरह मानते हैं जबकि उनका असली बेटा ल्युसेरो अपने पिता की जगह लेने के लिए बेताब है. ल्युसेरो पहले अपने पिता को मारता है और फिर मैक्स के विद्रोह की आशंका से डर कर वो उसके घर भी भाड़े के हत्यारे भेज देता है. लड़ाई में मैक्स का एकलौता बेटा मारा जाता है. मैक्स की बहन मारिया उसे किसी तरह बचा लेती है. 2 साल तक दोनों भाई बहन मिल कर ल्युसेरो को खत्म करने की योजना बनाते रहते हैं. एक मौका मिलने के साथ ही विध्वंस का एक ऐसा दौर शुरू होता है जिसमें है जबरदस्त एक्शन, गोलीबारी, धमाके, बढ़िया मार्शल आर्ट्स और अलग अलग हथियारों से दुश्मन को मौत के घाट उतारने के जबरदस्त सीन.

फिल्म में कोई बहुत बड़ी कहानी नहीं है. एक बड़ी ही सरल रिवेंज स्टोरी है. अपने मानक पिता और अपने एकलौते बेटे की मौत का बदला. ये बदला लेकिन बहुत हिंसक है. एक एक एक्शन सीन बहुत मेहनत से बनाया गया है. टीओ ने अपने स्टंट खुद ही किये हैं. बाथरूम में होने वाले एक्शन सीन का ज़िक्र करना ज़रूरी है जहाँ मैक्स अपने दुश्मनों को बहुत ही प्रभावी ढंग से खत्म करता है. बिना हथियार के और सिर्फ गेराज में उपलब्ध उपकरणों की मदद से मैक्स अपने हमलावरों को जिस तरीके से हराता है वो काबिल-ए-तारीफ होने के साथ साथ काफी खतरनाक भी है. फिल्म का अधिकांश हिस्सा एक्शन और स्टंट सीन में बँटा हुआ है और ये बात इस फिल्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. टीओ का एक्शन देख कर ब्रूस ली, जैकी छान, वैन डेम की फिल्मों की याद आती है. टीओ ब्रूस ली जैसा शक्तिशाली और चपल है, जैकी चैन जैसा चतुर है और वैन डैम जैसा फुर्तीला है और अपने पैरों का इस्तेमाल करना जानता है. फिल्म में मैक्स का एक नया चेला है लियो जो मैक्स को कभी ब्रूस ली तो कभी जैकी चैन बुलाता भी है.

इस फिल्म को देखिये और ज़रूर देखिये. फिल्म में कोई कहानी नहीं है. फिल्म में संभवतः कोई लॉजिक भी नजर नहीं आएगा. एक हीरो और हज़ार दुश्मन वाली कहानी है जिसमें हीरो बहुत कम चोट खा कर भी सभी दुश्मनों का सफाया कर देता है और विजयी होती है. इस फिल्म की खासियत है इसका सिंपल होना. कहानी बिलकुल एक लकीर की तरह है. फिल्म के हीरो टीओ गार्सीया का ही आईडिया है जिसे इवान लेडेसमा ने स्क्रीनप्ले में ढाला है. अगर आप हत्या और हिंसा से परहेज करते हैं तो ये फिल्म आपके लिए नहीं है. लेकिन अगर आप अपने अंदर के गुस्से को शांत करना चाहते हैं और स्वयं युद्ध नहीं करना चाहते तो ये फिल्म जरूर देखिये. थोड़ी से लम्बी लग सकती है मगर एक्शन सीक्वेंस आपको बांध के रखेंगे.undefined

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
स्क्रिनप्ल :
डायरेक्शन :
संगीत :

Tags: Film review, Netflix



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