World Environment Day: पर्यावरण की फिक्र में ‘कुछ खास’ करने वाले ‘चेंज मेकर्स’ की कहानी लेकर आया नेशनल ज्‍योग्राफिक

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World Environment Day: क्या आपने कभी सोचा है कि अगर हम सब हाथ मिलाकर प्रकृति का पोषण करने और एक स्थायी वातावरण बनाने के लिए एक साथ आएं तो हमारी पृथ्वी कैसा दिखेगी? दरअसल, किसी भी परिवर्तन करने के लिए केवल एक व्यक्ति की आवश्यकता होती है और उसकी छोटी सी भूमिका पर्यावरण संरक्षण में बहुत बड़ा ला सकती है. पृथ्वी को रहने के लिए एक बेहतर जगह बनाने के लिए परिवर्तन, आशा और प्रयासों की कहानियों को उजागर करते हुए नेशनल ज्योग्राफिक ने पिछले महीने पृथ्वी दिवस पर ‘वन फॉर चेंज’ शीर्षक से अपना मेगा प्रभावशाली अभियान शुरू किया था.

पृथ्वी दिवस पर अभियान की सफलता के बाद, विश्व पर्यावरण दिवस मनाने के लिए अपने अगले चरण में पहल करने के लिए पूरी तरह तैयार है. इस चरण में नेशनल ज्योग्राफिक पर्यावरण में परिवर्तन लाने वाले चेंजमेकर्स की कहानियों पर ध्यान केंद्रित करने जा रहा है. चैनल द्वारा तैयार की गई लघु फिल्‍में देश भर के विभिन्न चेंजमेकर्स को कहानी उजागर करेंगी, जो पर्यावरण को बहाल करने और संरक्षित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं और लोगों को अपना काम करने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं.

श्रृंखला में शामिल होने वाले चेंजमेकर्स पर्यावरण से जुड़ी एकरसता को तोड़ने के लिए अपनी कहानियों को सबसे गैर-पारंपरिक तरीके से बताएंगे. इन कहानियों की मदद से दर्शकों पर्यावरण संरक्षण के जरिए समाज में बदलाव लाने के लिए एक जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा.

‘वन फॉर चेंज’ में दिखेगी इन चेंज मेकर्स की कहानी

रामवीर तंवर: पर्यावरणविद् रामवीर तंवर को अब ‘पॉंड मैन ऑफ इंडिया’ के रूप में पहचाना जाता है. उत्‍तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा निवासी और पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर रामवीर तंवर ने 2018 में कॉपरेट नौकरी छोड़कर तालाबों के सुंदरीकरण और पुनर्जीवित के मकसद से ‘जल चौपाल’ नामक एक अभियान की शुरूआत की. गौतमबुद्ध नगर शुरू हुए इस अभियान की मदद से उन्‍होंने गाजियाबाद, सहारनपुर, पलवल, मानेसर के करीब 40 तालाबों को पुनर्जीवित किया. रामवीर तंवर ने लोगों को तालाबों से जोड़ने के लिए ‘सेल्फी विद पॉंड’ की भी शुरुआत की थी. वह ‘जल चौपाल’ अभियान के जरिए पानी के संरक्षण, तालाबों, झीलों और आर्द्रभूमि जैसे प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की कवादय में जुटे हुए हैं.

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स्नेहा शाही: गुजरात की एक प्रतिभाशाली पर्यावरणविद् स्नेहा शाही यूएनईपी के प्लास्टिक टाइड रनर अभियान से संबद्ध युवा कार्यकर्ताओं में से हैं और यूथ फॉर अर्थ अवार्ड की विजेता भी हैं. स्नेहा ने अपने पहले अभियान की शुरूआत अपने दोस्‍तों के साथ गृहनगर वडोदरा में एक नाले की शुरूआत की. हालांकि, इस नाले से करीब 700 किलो प्‍लास्टिक का कचरा निकालने के बाद पता चला कि वह नाला नहीं, बल्कि जल की एक ऐसी प्राकृतिक धारा है, जहां जल जीवों का धराना हुआ करती थी. स्‍नेहा के प्रयासों से मानसून में गंगा नदी से आए फ्लैपशेल कछुओं और मगरमच्छों को अपना पुराना घराना वापस मिल गया.

रिपु दमन बेवली: फिट इंडिया मूवमेंट के राजदूतों में से एक रिपु दमन बेवली की पहचान ‘प्‍लॉगमैन ऑफ इंडिया’ के रूप में हैं. पर्यावरणविद् और सामजिक कार्यकर्ता रिपु दमन बेवली ने न केवल देश को प्‍लॉगिंग की नई अवधारणा दी है, बल्कि प्‍लॉगिंग के जरिए कचरे की समस्‍या से निपटने के लिए एक नई दिशा प्रदान की है. फिटनेस और साफ-सफाई के गहरे जुनून ने रिपू को भारत में प्लॉगिंग को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रेरित किया था. वह खुद के साथ-साथ प्रकृति को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए पूरे देश में प्लॉगिंग के कॉन्‍सेप्‍ट को फैला रहे हैं.

रिभु वोहरा: तमिलनाडु के ऑरोविल शहर में जन्‍में रिभु वोहरा ने नीदरलैंड से हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट में बैचलर डिग्री और इनोवेशन कम्‍युनिकेशन में डिप्‍लोमा हासिल करने के बाद कॉपरेट जगत में अपने कदम रखे. 2008 में उन्‍होंने अपनी कॉपरेट की नौकरी छोड़ दी और अपनी पत्‍नी के साथ भारत भ्रमण में निकल गए. करीब एक साल के अपने इस भ्रमण में दौरान उन्‍हें भारत में कचरे की विकट हो चुकी समस्‍या का अहसास हुआ और यहीं से उनके नए अभियान की शुरूआत हुई. इस अभियान के तहत,  उन्‍होंने स्‍थानीय निवासियों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर कचरा प्रबंधन परियोजनाओं पर काम शुरू किया. इस बीच, उन्‍होंने कचरे से निपटने के नवीन और टिकाऊ तरीकों पर शोध किया और कचरे की रचनात्मक गतिविधि-आधारित शैक्षिक कार्यक्रम गारबोलॉजी 101 विकसित की.

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मनसुखभाई प्रजापति: मनसुखभाई राघवजीभाई प्रजापति भारत में एक प्रसिद्ध ग्रामीण नवप्रवर्तनक हैं, जो अपने मिट्टी-आधारित कार्यात्मक उत्पादों जैसे मित्तिकूल, नॉन स्टिक क्ले तवा और कम लागत वाले पानी के फिल्टर के लिए जाने जाते हैं. मनसुखभाई की कम लागत, बायोडिग्रेडेबल मिट्टी के नवाचारों ने साबित कर दिया है कि पर्यावरण की तरफ एक एक अच्छा प्रयास हर किसी का व्यवसाय हो सकता है. मन‍सुख भाई ने बिना बिजली के चलने वाले इकोफ्रेंडली फ्रिज के साथ साथ मिट्टी से बने करीब 250 प्रोडक्‍ट्स का इजाद किया है.

अंशु गुप्ता: गैर-सरकारी संगठन गूंज के संस्‍थापक अंशु गुप्ता एक भारतीय उद्यमी हैं. गूंज शहरी और ग्रामीण असमानता के बीच की खाई को पाटने का काम करती है. गरीबों के लिए सम्मान वह प्रेरक शक्ति थी, जिसने अंशु को पूरे भारत के शहरी कचरे को देश के कोने-कोने में वंचितों के लिए उपयोगी संसाधनों में बदल दिया.

प्रियदर्शन सहस्रबुद्धे: एक आईआईटी स्नातक प्रियदर्शन ने ‘वायु’ नामक एक ऐसी मशीन का आविष्कार किया है, जो जैविक कचरे को स्वच्छ ईंधन में परिवर्तित करती है. इस मशीन की मदद से प्रदूषणकारी जीवाश्म ईंधन पर हमारी निर्भरता कम हो जाती है. उन्होंने एचएसबीसी के सहयोग से अमेरिका स्थित अशोक चेंजमेकर्स द्वारा आयोजित ग्रीन स्किल्स इनोवेशन चैलेंज जीता है. सहस्रबुद्धे के ‘वायु’ – खाद्य अपशिष्ट को हरित ईंधन या ऊर्जा में परिवर्तित करने की प्रक्रिया में दुनिया भर के 348 प्रतियोगियों में शीर्ष 12 में स्थान दिया है.

Tags: Environment news, Save environment, World environment day



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